जब से भारत सरकार ने विदेशी इंटरनेट मीडिया को नियंत्रित करने हेतु नये नियमो को मंजूरी दी है तब से इन दोनों पक्षों के बीच हायतौबा मची हुई है।एक तरफ सरकार जहाँ राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा की दृष्टि से व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी नियंत्रण में लाना चाहती है तो दूसरी तरफ व्हाट्सअप ,ट्विटर जैसे विदेशी सोशल इंटरनेट मीडिया व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता के अधिकार की दुहाई देकर सरकारी नियमो का विरोध कर रहे हैं।वैसे देखा जाए तो दोनों ही पक्षों के तर्क महत्वपूर्ण है वशर्ते मंशा स्वच्छ हो।अभी हाल ही में माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर द्वारा नाइजीरिया के राष्ट्रपति और भारत के उपराष्ट्रपति के ट्विटर एकाउंट के साथ की गई कार्यवाही एकदम पक्षपातपूर्ण है।सोशल इंटरनेट मीडिया को यह समझना होगा कि पूरे विश्व मे एक ही प्रकार की सोच और क्रियाविधि से संचालन संभव नही है।हर एक राष्ट्र का अपना एक विशिष्ठ संविधान है और अपनी विशिष्ठ संस्कृति और जीवनशैली है।सरकार को भी यह समझना होगा कि आज के दौर में सोशल मीडिया भी हमारी आधुनिक संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन गया है जिसके कुछेक सार्थक परिणाम सरकारी नीतियों के लिए भी आधार बन गए है।अतः आशा है कि जल्दी ही इस दिशा में दोनों पक्ष आमजन को ध्यान में रखते हुए उचित समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।
आभार
विनोद शर्मा
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